ज़िंदगी का एक-एक पल
ज़िंदगी का एक-एक पल गुज़रता जाता है, हम भी किसी चाह में मंज़िल पर पहुँचते जाते हैं। ज़िंदगी का अर्थ है कुछ न कुछ करते रहना, हम भी कुछ न कुछ किए चले जाते हैं। ज़िंदगी का काम है कुछ…
ज़िंदगी का एक-एक पल गुज़रता जाता है,
हम भी किसी चाह में मंज़िल पर पहुँचते जाते हैं।
ज़िंदगी का अर्थ है कुछ न कुछ करते रहना,
हम भी कुछ न कुछ किए चले जाते हैं।
ज़िंदगी का काम है कुछ लेना और फिर देना,
हम भी कभी ज़्यादा, तो कभी कम
लेते-देते चले जाते हैं।
ज़िंदगी को है हमसे शिकायत,
हमें भी उससे शिकायत है,
फिर भी न जाने कैसी डोर है यह—
कि दोनों संग-संग चले जाते हैं।
न जाने किस मोड़ पर ठहरेंगे हम,
न जाने कौन-सी मंज़िल आख़िरी होगी,
बस समय की राह पर चलते-चलते
एक दिन ख़ामोशी से ढलते जाते हैं।
ज़िंदगी का एक-एक पल गुज़रता जाता है,
और हम भी...
अपने होने का अर्थ खोजते जाते हैं।
Hyderabad, October 2026.
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